Goddestination

Al-Mursalaat

अल-मुरसलात

भेजे गए

50 ayahsMeccanहिन्दी

Now playing Watch on YouTube

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 وَٱلۡمُرۡسَلَـٰتِ عُرۡفࣰا

    वल मुरसलात उरफान

    हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं

  2. 2 فَٱلۡعَـٰصِفَـٰتِ عَصۡفࣰا

    फ़लआसिफ़ात अस्फान

    फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं

  3. 3 وَٱلنَّـٰشِرَ ٰ⁠تِ نَشۡرࣰا

    वलनाशिरा विश्वास ते नश्रन

    और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं

  4. 4 فَٱلۡفَـٰرِقَـٰتِ فَرۡقࣰا

    फ़ाल फ़ारिकाति फ़र्क़न

    फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं

  5. 5 فَٱلۡمُلۡقِیَـٰتِ ذِكۡرًا

    फ़ाल्मुल्कियाति ज़िक्रा

    फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं

  6. 6 عُذۡرًا أَوۡ نُذۡرًا

    उज़्रान औ नुज़रा

    ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए

  7. 7 إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَ ٰ⁠قِعࣱ

    तुआदूनों लवा विश्वास क़ाफ़

    कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा

  8. 8 فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتۡ

    फ़ैज़ा अन-नुजूम तुमेसेत

    फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी

  9. 9 وَإِذَا ٱلسَّمَاۤءُ فُرِجَتۡ

    वा इज़ा अस-समाउ फ़ुरिजात

    और जब आसमान फट जाएगा

  10. 10 وَإِذَا ٱلۡجِبَالُ نُسِفَتۡ

    वा इज़ा अल-जिबालु नुसेफ़त

    और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे

  11. 11 وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتۡ

    वा इज़ा अर-रुसुलु उक़्तितत

    और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे

  12. 12 لِأَیِّ یَوۡمٍ أُجِّلَتۡ

    ले अय्य यौम उज्जिलत

    (फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है

  13. 13 لِیَوۡمِ ٱلۡفَصۡلِ

    लेयोमि अल-फ़स्ली

    फ़ैसले के दिन के लिए

  14. 14 وَمَاۤ أَدۡرَىٰكَ مَا یَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِ

    अद्राका यौम अल-फ़स्ली

    और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है

  15. 15 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

  16. 16 أَلَمۡ نُهۡلِكِ ٱلۡأَوَّلِینَ

    अलम नुह्लिकि अल-अव्वालीन

    क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया

  17. 17 ثُمَّ نُتۡبِعُهُمُ ٱلۡـَٔاخِرِینَ

    सुम्म नुत्बिउहुम अल-आख़िरीन

    फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे

  18. 18 كَذَ ٰ⁠لِكَ نَفۡعَلُ بِٱلۡمُجۡرِمِینَ

    कज़ा विश्वास लेका नफअलु बिल मुजरिमीन

    हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं

  19. 19 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

  20. 20 أَلَمۡ نَخۡلُقكُّم مِّن مَّاۤءࣲ مَّهِینࣲ

    अलम नख़्लुक्कुम मिन मा महीन

    क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया

  21. 21 فَجَعَلۡنَـٰهُ فِی قَرَارࣲ مَّكِینٍ

    फा-जा-लना-हू फ़े क़रार मकीन

    फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक

  22. 22 إِلَىٰ قَدَرࣲ مَّعۡلُومࣲ

    इला क़दर मालूम

    एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा

  23. 23 فَقَدَرۡنَا فَنِعۡمَ ٱلۡقَـٰدِرُونَ

    फ़कदरना फ़ानिम अल-क़ादिरून

    फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं

  24. 24 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

  25. 25 أَلَمۡ نَجۡعَلِ ٱلۡأَرۡضَ كِفَاتًا

    अलम नजअलि अल-अर्द केफातान

    क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया

  26. 26 أَحۡیَاۤءࣰ وَأَمۡوَ ٰ⁠تࣰا

    अहयाऊँ वअम्व विश्वास ता

    और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए

  27. 27 وَجَعَلۡنَا فِیهَا رَوَ ٰ⁠سِیَ شَـٰمِخَـٰتࣲ وَأَسۡقَیۡنَـٰكُم مَّاۤءࣰ فُرَاتࣰا

    वजअल्ना फ़िहा रवा विश्वास सेया शामिखात और हमने तुम्हें पिलाया फुरातान

    और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया

  28. 28 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

  29. 29 ٱنطَلِقُوۤا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ

    इंतालिकू इला कुंतुम बेहि तुकज़्ज़िबून

    जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो

  30. 30 ٱنطَلِقُوۤا۟ إِلَىٰ ظِلࣲّ ذِی ثَلَـٰثِ شُعَبࣲ

    इंतालिकू इला ज़िल्ल ज़ी सलासि शुआब

    (धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं

  31. 31 لَّا ظَلِیلࣲ وَلَا یُغۡنِی مِنَ ٱللَّهَبِ

    ला ज़लील युग्नी मिन अल्लाहबि

    जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा

  32. 32 إِنَّهَا تَرۡمِی بِشَرَرࣲ كَٱلۡقَصۡرِ

    इन्नाहा तर्मी बेशरर कल क़सरी

    उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल

  33. 33 كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتࣱ صُفۡرࣱ

    काअन्नाहु जमालतुन सुफ़्र

    गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं

  34. 34 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

  35. 35 هَـٰذَا یَوۡمُ لَا یَنطِقُونَ

    हाज़ा यौम यंतिक़ून

    ये वह दिन होगा कि लोग लब तक न हिला सकेंगे

  36. 36 وَلَا یُؤۡذَنُ لَهُمۡ فَیَعۡتَذِرُونَ

    यूउज़नु लाहुम फ़याऽत्ज़िरून

    और उनको इजाज़त दी जाएगी कि कुछ उज्र माअज़ेरत कर सकें

  37. 37 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है

  38. 38 هَـٰذَا یَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِۖ جَمَعۡنَـٰكُمۡ وَٱلۡأَوَّلِینَ

    हाज़ा यौम जमअनाकुम वल अव्वलीन

    यही फैसले का दिन है (जिस में) हमने तुमको और अगलों को इकट्ठा किया है

  39. 39 فَإِن كَانَ لَكُمۡ كَیۡدࣱ فَكِیدُونِ

    फा-इन काना लकुम कैद फ़ेकिदूने

    तो अगर तुम्हें कोई दाँव करना हो तो आओ चल चुको

  40. 40 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

  41. 41 إِنَّ ٱلۡمُتَّقِینَ فِی ظِلَـٰلࣲ وَعُیُونࣲ

    इन्ना अल-मुत्तक़ीन फ़े ज़िलाल वअयून

    बेशक परहेज़गार लोग (दरख्तों की) घनी छाँव में होंगे

  42. 42 وَفَوَ ٰ⁠كِهَ مِمَّا یَشۡتَهُونَ

    वफव विश्वास केह मेमा यश्तहून

    और चश्मों और आदमियों में जो उन्हें मरग़ूब हो

  43. 43 كُلُوا۟ وَٱشۡرَبُوا۟ هَنِیۤـَٔۢا بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

    कुलू वशरुबू हानिया बिमा तामलून

    (दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो

  44. 44 إِنَّا كَذَ ٰ⁠لِكَ نَجۡزِی ٱلۡمُحۡسِنِینَ

    कज़ा विश्वास लेका नज्ज़ी अल-मुहसिनीन

    मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं

  45. 45 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

  46. 46 كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِیلًا إِنَّكُم مُّجۡرِمُونَ

    कुलू व तमत्तऊ कलीलान इन्नाकुम मुजरिमून

    (झुठलाने वालों) चन्द दिन चैन से खा पी लो तुम बेशक गुनेहगार हो

  47. 47 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

  48. 48 وَإِذَا قِیلَ لَهُمُ ٱرۡكَعُوا۟ لَا یَرۡكَعُونَ

    वा इज़ा क़िला लहुम इरकाउ यार्कऔना

    और जब उनसे कहा जाता है कि रूकूउ करों तो रूकूउ नहीं करते

  49. 49 وَیۡلࣱ یَوۡمَىِٕذࣲ لِّلۡمُكَذِّبِینَ

    वैल यौमाइज़ि लिल्मुकज़्ज़िबीन

    उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

  50. 50 فَبِأَیِّ حَدِیثِۭ بَعۡدَهُۥ یُؤۡمِنُونَ

    फ़बैय्यि हदीस बादहु यूमीनून

    अब इसके बाद ये किस बात पर ईमान लाएँगे

This surah in other languages