Goddestination

Al-Insaan

अल-इंसान

मानव

31 ayahsMedinanहिन्दी

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بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 هَلۡ أَتَىٰ عَلَى ٱلۡإِنسَـٰنِ حِینࣱ مِّنَ ٱلدَّهۡرِ لَمۡ یَكُن شَیۡـࣰٔا مَّذۡكُورًا

    हल अता अलै अल-इंसान हाइन मिन अद-दह्रि लम याकुन मज़्कुरान

    बेशक इन्सान पर एक ऐसा वक्त अा चुका है कि वह कोई चीज़ क़ाबिले ज़िक्र न था

  2. 2 إِنَّا خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَـٰنَ مِن نُّطۡفَةٍ أَمۡشَاجࣲ نَّبۡتَلِیهِ فَجَعَلۡنَـٰهُ سَمِیعَۢا بَصِیرًا

    ख़लक़ना अल-इंसान मिन नुत्फा अमशाज नब्तलिहि फा-जा-लना-हू समीआ बसीरान

    हमने इन्सान को मख़लूत नुत्फे से पैदा किया कि उसे आज़माये तो हमने उसे सुनता देखता बनाया

  3. 3 إِنَّا هَدَیۡنَـٰهُ ٱلسَّبِیلَ إِمَّا شَاكِرࣰا وَإِمَّا كَفُورًا

    हदैना अस-सबील इम्मा शाकिरन वा इम्मा कफ़ूरान

    और उसको रास्ता भी दिखा दिया (अब वह) ख्वाह शुक्र गुज़ार हो ख्वाह नाशुक्रा

  4. 4 إِنَّاۤ أَعۡتَدۡنَا لِلۡكَـٰفِرِینَ سَلَـٰسِلَا۟ وَأَغۡلَـٰلࣰا وَسَعِیرًا

    इन्ना अ'तेदना लिल काफिरीन सलासिला वा अग़्लालन वसैरान

    हमने काफ़िरों के ज़ंजीरे, तौक और दहकती हुई आग तैयार कर रखी है

  5. 5 إِنَّ ٱلۡأَبۡرَارَ یَشۡرَبُونَ مِن كَأۡسࣲ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا

    इन्ना अल-अब्रार यशरबून मिन कस काना मेज़ाजुहा कफ़ूर

    बेशक नेकोकार लोग शराब के वह सागर पियेंगे जिसमें काफूर की आमेज़िश होगी ये एक चश्मा है जिसमें से ख़ुदा के (ख़ास) बन्दे पियेंगे

  6. 6 عَیۡنࣰا یَشۡرَبُ بِهَا عِبَادُ ٱللَّهِ یُفَجِّرُونَهَا تَفۡجِیرࣰا

    ऐना येशरबु बेहा इबादु अल्लाह युफज्जिरुनाहा तफ़्जीरान

    और जहाँ चाहेंगे बहा ले जाएँगे

  7. 7 یُوفُونَ بِٱلنَّذۡرِ وَیَخَافُونَ یَوۡمࣰا كَانَ شَرُّهُۥ مُسۡتَطِیرࣰا

    यूफोन बिल्नज़्रि वयख़ाफ़ूना यौमन काना शर्रुहु मुस्ततिरान

    ये वह लोग हैं जो नज़रें पूरी करते हैं और उस दिन से जिनकी सख्ती हर तरह फैली होगी डरते हैं

  8. 8 وَیُطۡعِمُونَ ٱلطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ مِسۡكِینࣰا وَیَتِیمࣰا وَأَسِیرًا

    वयूतिमून अत-तआम अला हुब्बिही मिस्कीन वयेतिमाँ वासिरान

    और उसकी मोहब्बत में मोहताज और यतीम और असीर को खाना खिलाते हैं

  9. 9 إِنَّمَا نُطۡعِمُكُمۡ لِوَجۡهِ ٱللَّهِ لَا نُرِیدُ مِنكُمۡ جَزَاۤءࣰ وَلَا شُكُورًا

    नुतिमुकुम लेवज्ह अल्लाह नुरीदु मिन्कुम जज़ा शुकुरान

    (और कहते हैं कि) हम तो तुमको बस ख़ालिस ख़ुदा के लिए खिलाते हैं हम न तुम से बदले के ख़ास्तगार हैं और न शुक्र गुज़ारी के

  10. 10 إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا یَوۡمًا عَبُوسࣰا قَمۡطَرِیرࣰا

    नखाफ़ु मिन रब्बिना यौमा अबूसन क़म्तरीरान

    हमको तो अपने परवरदिगार से उस दिन का डर है जिसमें मुँह बन जाएँगे (और) चेहरे पर हवाइयाँ उड़ती होंगी

  11. 11 فَوَقَىٰهُمُ ٱللَّهُ شَرَّ ذَ ٰ⁠لِكَ ٱلۡیَوۡمِ وَلَقَّىٰهُمۡ نَضۡرَةࣰ وَسُرُورࣰا

    फ़ौक़ियाहुमु अल्लाह शर्र ज़ा विश्वास लेका अल-यौमि वलक्काहुम नज़रा वसुरुरन

    तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा और उनको ताज़गी और ख़ुशदिली अता फरमाएगा

  12. 12 وَجَزَىٰهُم بِمَا صَبَرُوا۟ جَنَّةࣰ وَحَرِیرࣰا

    वजायाहुम बिमा सबरू जन्नत वहरीरान

    और उनके सब्र के बदले (बेहिश्त के) बाग़ और रेशम (की पोशाक) अता फ़रमाएगा

  13. 13 مُّتَّكِـِٔینَ فِیهَا عَلَى ٱلۡأَرَاۤىِٕكِۖ لَا یَرَوۡنَ فِیهَا شَمۡسࣰا وَلَا زَمۡهَرِیرࣰا

    मुत्तकीना फ़िहा अलै यारवोन फ़िहा शम्सन ज़म्हरीर

    वहाँ वह तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे न वहाँ (आफताब की) धूप देखेंगे और न शिद्दत की सर्दी

  14. 14 وَدَانِیَةً عَلَیۡهِمۡ ظِلَـٰلُهَا وَذُلِّلَتۡ قُطُوفُهَا تَذۡلِیلࣰا

    वदानियाह अलैहिम ज़िलालुहा वज़ुल्लिलत क़ुतूफ़हा तज़्लीलाँ

    और घने दरख्तों के साए उन पर झुके हुए होंगे और मेवों के गुच्छे उनके बहुत क़रीब हर तरह उनके एख्तेयार में

  15. 15 وَیُطَافُ عَلَیۡهِم بِـَٔانِیَةࣲ مِّن فِضَّةࣲ وَأَكۡوَابࣲ كَانَتۡ قَوَارِیرَا۠

    वयूटाफ़ू बिआनिया मिन चांदी कानत क़वारिरा

    और उनके सामने चाँदी के साग़र और शीशे के निहायत शफ्फ़ाफ़ गिलास का दौर चल रहा होगा

  16. 16 قَوَارِیرَا۟ مِن فِضَّةࣲ قَدَّرُوهَا تَقۡدِیرࣰا

    मिन चांदी क़द्दारुहा तक़दीरान

    और शीशे भी (काँच के नहीं) चाँदी के जो ठीक अन्दाज़े के मुताबिक बनाए गए हैं

  17. 17 وَیُسۡقَوۡنَ فِیهَا كَأۡسࣰا كَانَ مِزَاجُهَا زَنجَبِیلًا

    वयुस्कौन फ़िहा कासा काना मेज़ाजुहा ज़ंजबीलां

    और वहाँ उन्हें ऐसी शराब पिलाई जाएगी जिसमें जनजबील (के पानी) की आमेज़िश होगी

  18. 18 عَیۡنࣰا فِیهَا تُسَمَّىٰ سَلۡسَبِیلࣰا

    ऐना फ़िहा तुसम्मा सलसबील

    ये बेहश्त में एक चश्मा है जिसका नाम सलसबील है

  19. 19 ۞ وَیَطُوفُ عَلَیۡهِمۡ وِلۡدَ ٰ⁠نࣱ مُّخَلَّدُونَ إِذَا رَأَیۡتَهُمۡ حَسِبۡتَهُمۡ لُؤۡلُؤࣰا مَّنثُورࣰا

    वयतूफ़ु अलैहिम वेल्द विश्वास नाँ मुखल्लदून इज़ा राअसहुम हसिबतहुम लुलुआ मंसूर

    और उनके सामने हमेशा एक हालत पर रहने वाले नौजवाल लड़के चक्कर लगाते होंगे कि जब तुम उनको देखो तो समझो कि बिखरे हुए मोती हैं

  20. 20 وَإِذَا رَأَیۡتَ ثَمَّ رَأَیۡتَ نَعِیمࣰا وَمُلۡكࣰا كَبِیرًا

    वा इज़ा रायता सम् रायता नईम वा मुल्कन कबीरा

    और जब तुम वहाँ निगाह उठाओगे तो हर तरह की नेअमत और अज़ीमुश शान सल्तनत देखोगे

  21. 21 عَـٰلِیَهُمۡ ثِیَابُ سُندُسٍ خُضۡرࣱ وَإِسۡتَبۡرَقࣱۖ وَحُلُّوۤا۟ أَسَاوِرَ مِن فِضَّةࣲ وَسَقَىٰهُمۡ رَبُّهُمۡ شَرَابࣰا طَهُورًا

    अलियहुम थेयाबु सुंदुस ख़ोदर वा इस्ताबराकुन वहुल्लुआ असाविरा मिन चांदी व सक़ा हुम शराबन तहुरान

    उनके ऊपर सब्ज़ क्रेब और अतलस की पोशाक होगी और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका परवरदिगार उन्हें निहायत पाकीज़ा शराब पिलाएगा

  22. 22 إِنَّ هَـٰذَا كَانَ لَكُمۡ جَزَاۤءࣰ وَكَانَ سَعۡیُكُم مَّشۡكُورًا

    इन्ना हाज़ा काना लकुम जज़ा वा काना सईउकुम मशकूरान

    ये यक़ीनी तुम्हारे लिए होगा और तुम्हारी (कारगुज़ारियों के) सिले में और तुम्हारी कोशिश क़ाबिले शुक्र गुज़ारी है

  23. 23 إِنَّا نَحۡنُ نَزَّلۡنَا عَلَیۡكَ ٱلۡقُرۡءَانَ تَنزِیلࣰا

    नह्नु नज़्ज़ल्ना अलैक कुरान तंज़ीलन

    (ऐ रसूल) हमने तुम पर क़ुरान को रफ्ता रफ्ता करके नाज़िल किया

  24. 24 فَٱصۡبِرۡ لِحُكۡمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعۡ مِنۡهُمۡ ءَاثِمًا أَوۡ كَفُورࣰا

    फ़ास्बिर लेहुक्मि रब्बिक तूती मिन्हुम आसिमन औ क़फूरन

    तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तज़ार में सब्र किए रहो और उन लोगों में से गुनाहगार और नाशुक्रे की पैरवी न करना

  25. 25 وَٱذۡكُرِ ٱسۡمَ رَبِّكَ بُكۡرَةࣰ وَأَصِیلࣰا

    वज़्कुरि इस्म रब्बिक बुक्रा वा सीलन

    सुबह शाम अपने परवरदिगार का नाम लेते रहो

  26. 26 وَمِنَ ٱلَّیۡلِ فَٱسۡجُدۡ لَهُۥ وَسَبِّحۡهُ لَیۡلࣰا طَوِیلًا

    वोमेन अल-लैल फस्जुद वसब्बिहु लैलन तौइलान

    और कुछ रात गए उसका सजदा करो और बड़ी रात तक उसकी तस्बीह करते रहो

  27. 27 إِنَّ هَـٰۤؤُلَاۤءِ یُحِبُّونَ ٱلۡعَاجِلَةَ وَیَذَرُونَ وَرَاۤءَهُمۡ یَوۡمࣰا ثَقِیلࣰا

    इन्ना हाउलाए युहिबुना अल-आजिला वयज़ुरून वराआहुम यौमन सक़ीलन

    ये लोग यक़ीनन दुनिया को पसन्द करते हैं और बड़े भारी दिन को अपने पसे पुश्त छोड़ बैठे हैं

  28. 28 نَّحۡنُ خَلَقۡنَـٰهُمۡ وَشَدَدۡنَاۤ أَسۡرَهُمۡۖ وَإِذَا شِئۡنَا بَدَّلۡنَاۤ أَمۡثَـٰلَهُمۡ تَبۡدِیلًا

    नह्नु ख़लक़नाहुम वशदद्ना अस्रहुम वा इज़ा शेना बद्दलना अम्सालहुम तबदीलान

    हमने उनको पैदा किया और उनके आज़ा को मज़बूत बनाया और अगर हम चाहें तो उनके बदले उन्हीं के जैसे लोग ले आएँ

  29. 29 إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذۡكِرَةࣱۖ فَمَن شَاۤءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِیلࣰا

    इन्ना हाज़िही फ़मान शा इत्तख़ाज़ा इला सबीलन

    बेशक ये कुरान सरासर नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह ले

  30. 30 وَمَا تَشَاۤءُونَ إِلَّاۤ أَن یَشَاۤءَ ٱللَّهُۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِیمًا حَكِیمࣰا

    वमा तशाऊना अन यशा इन्ना अल्लाह काना अलीमान हकीमन

    और जब तक ख़ुदा को मंज़ूर न हो तुम लोग कुछ भी चाह नहीं सकते बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार दाना है

  31. 31 یُدۡخِلُ مَن یَشَاۤءُ فِی رَحۡمَتِهِۦۚ وَٱلظَّـٰلِمِینَ أَعَدَّ لَهُمۡ عَذَابًا أَلِیمَۢا

    युज़्खिलु मैन यशा फ़े रहमतिहि वज़्-ज़ा-ली-मीन अअद्दा लाहुम अज़ाबाँ अलीमा

    जिसको चाहे अपनी रहमत में दाख़िल कर ले और ज़ालिमों के वास्ते उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है

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