Goddestination

Al-A'laa

अल-आला

सर्वोच्च

19 ayahsMeccanहिन्दी

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بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 سَبِّحِ ٱسۡمَ رَبِّكَ ٱلۡأَعۡلَى

    सब्बिह इस्म रब्बिक अल आ'ला

    ऐ रसूल अपने आलीशान परवरदिगार के नाम की तस्बीह करो

  2. 2 ٱلَّذِی خَلَقَ فَسَوَّىٰ

    अल्लाज़ी ख़लक़ फ़सव्वा

    जिसने (हर चीज़ को) पैदा किया

  3. 3 وَٱلَّذِی قَدَّرَ فَهَدَىٰ

    वल्लाज़ी क़द्दारा फ़हदिया

    और दुरूस्त किया और जिसने (उसका) अन्दाज़ा मुक़र्रर किया फिर राह बतायी

  4. 4 وَٱلَّذِیۤ أَخۡرَجَ ٱلۡمَرۡعَىٰ

    अख़रज अल-मार'आ

    और जिसने (हैवानात के लिए) चारा उगाया

  5. 5 فَجَعَلَهُۥ غُثَاۤءً أَحۡوَىٰ

    फजअलहु ग़ुसाआं अहवा

    फिर ख़ुश्क उसे सियाह रंग का कूड़ा कर दिया

  6. 6 سَنُقۡرِئُكَ فَلَا تَنسَىٰۤ

    सनुक्रिउकु फ़ला तंसा

    हम तुम्हें (ऐसा) पढ़ा देंगे कि कभी भूलो ही नहीं

  7. 7 إِلَّا مَا شَاۤءَ ٱللَّهُۚ إِنَّهُۥ یَعۡلَمُ ٱلۡجَهۡرَ وَمَا یَخۡفَىٰ

    इल्ला शा इन्नाहु यालमु अल-जहरा वमा यख़्फा

    मगर जो ख़ुदा चाहे (मन्सूख़ कर दे) बेशक वह खुली बात को भी जानता है और छुपे हुए को भी

  8. 8 وَنُیَسِّرُكَ لِلۡیُسۡرَىٰ

    वा-नु-यस-सिर-का लिल युसरा

    और हम तुमको आसान तरीके की तौफ़ीक़ देंगे

  9. 9 فَذَكِّرۡ إِن نَّفَعَتِ ٱلذِّكۡرَىٰ

    फ़ज़्किर इन नफ़अत अज़-ज़िक्रा

    तो जहाँ तक समझाना मुफ़ीद हो समझते रहो

  10. 10 سَیَذَّكَّرُ مَن یَخۡشَىٰ

    सयज़्ज़करु मैन यख़्शा

    जो खौफ रखता हो वह तो फौरी समझ जाएगा

  11. 11 وَیَتَجَنَّبُهَا ٱلۡأَشۡقَى

    वयतजन्नाबुहा अल-अश्का

    और बदबख्त उससे पहलू तही करेगा

  12. 12 ٱلَّذِی یَصۡلَى ٱلنَّارَ ٱلۡكُبۡرَىٰ

    अल्लाज़ी यसला अन-नार अल-कुबरा

    जो (क़यामत में) बड़ी (तेज़) आग में दाख़िल होगा

  13. 13 ثُمَّ لَا یَمُوتُ فِیهَا وَلَا یَحۡیَىٰ

    सुम्म यमुतु फ़िहा याह्या

    फिर न वहाँ मरेगा ही न जीयेगा

  14. 14 قَدۡ أَفۡلَحَ مَن تَزَكَّىٰ

    क़द अफ़्लह मैन तज़क्का

    वह यक़ीनन मुराद दिली को पहुँचा जो (शिर्क से) पाक हो

  15. 15 وَذَكَرَ ٱسۡمَ رَبِّهِۦ فَصَلَّىٰ

    वज़कर इस्म फ़सल्ला

    और अपने परवरदिगार का ज़िक्र करता और नमाज़ पढ़ता रहा

  16. 16 بَلۡ تُؤۡثِرُونَ ٱلۡحَیَوٰةَ ٱلدُّنۡیَا

    तु'सिरून अल-हयात दुनिया

    मगर तुम लोग दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह देते हो

  17. 17 وَٱلۡـَٔاخِرَةُ خَیۡرࣱ وَأَبۡقَىٰۤ

    वल-आख़िरतु ख़ैर वा अब्का

    हालॉकि आख़ोरत कहीं बेहतर और देर पा है

  18. 18 إِنَّ هَـٰذَا لَفِی ٱلصُّحُفِ ٱلۡأُولَىٰ

    इन्ना हाज़ा लाफ़ी अस-सुहुफ़ि अल-उला

    बेशक यही बात अगले सहीफ़ों

  19. 19 صُحُفِ إِبۡرَ ٰ⁠هِیمَ وَمُوسَىٰ

    सुहुफि इबरा विश्वास हेइम वमूसा

    इबराहीम और मूसा के सहीफ़ों में भी है

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