Goddestination

Al-Balad

अल-बलद

शहर

20 ayahsMeccanहिन्दी

Now playing Watch on YouTube

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 لَاۤ أُقۡسِمُ بِهَـٰذَا ٱلۡبَلَدِ

    ला उक़्सिमु बेहाज़ा अल-बलद

    मुझे इस शहर (मक्का) की कसम

  2. 2 وَأَنتَ حِلُّۢ بِهَـٰذَا ٱلۡبَلَدِ

    और तुम हुल्लु बेहाज़ा अल-बलद

    और तुम इसी शहर में तो रहते हो

  3. 3 وَوَالِدࣲ وَمَا وَلَدَ

    ववाल वमा वलद

    और (तुम्हारे) बाप (आदम) और उसकी औलाद की क़सम

  4. 4 لَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَـٰنَ فِی كَبَدٍ

    लकद ख़लक़ना अल-इंसान फ़े काबदिन

    हमने इन्सान को मशक्क़त में (रहने वाला) पैदा किया है

  5. 5 أَیَحۡسَبُ أَن لَّن یَقۡدِرَ عَلَیۡهِ أَحَدࣱ

    अ यह्सबु अन लान यक़्दिर अलय्हि अहद

    क्या वह ये समझता है कि उस पर कोई काबू न पा सकेगा

  6. 6 یَقُولُ أَهۡلَكۡتُ مَالࣰا لُّبَدًا

    यकूलु अहलकतु माला लुब्दान

    वह कहता है कि मैने अलग़ारों माल उड़ा दिया

  7. 7 أَیَحۡسَبُ أَن لَّمۡ یَرَهُۥۤ أَحَدٌ

    अ यह्सबु अन लम अहदुन

    क्या वह ये ख्याल रखता है कि उसको किसी ने देखा ही नहीं

  8. 8 أَلَمۡ نَجۡعَل لَّهُۥ عَیۡنَیۡنِ

    अलम नजअल अल्लाहु ऐनैन

    क्या हमने उसे दोनों ऑंखें और ज़बान

  9. 9 وَلِسَانࣰا وَشَفَتَیۡنِ

    वलेसना वशफतय्नि

    और दोनों लब नहीं दिए (ज़रूर दिए)

  10. 10 وَهَدَیۡنَـٰهُ ٱلنَّجۡدَیۡنِ

    वहदैनाहु अन-नज्दैन

    और उसको (अच्छी बुरी) दोनों राहें भी दिखा दीं

  11. 11 فَلَا ٱقۡتَحَمَ ٱلۡعَقَبَةَ

    फ़ला इक़्तहम अल-अक़बा

    फिर वह घाटी पर से होकर (क्यों) नहीं गुज़रा

  12. 12 وَمَاۤ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلۡعَقَبَةُ

    अद्राका अल-अक़बा

    और तुमको क्या मालूम कि घाटी क्या है

  13. 13 فَكُّ رَقَبَةٍ

    फक्कु रक़बतिन

    किसी (की) गर्दन का (गुलामी या कर्ज से) छुड़ाना

  14. 14 أَوۡ إِطۡعَـٰمࣱ فِی یَوۡمࣲ ذِی مَسۡغَبَةࣲ

    औ इतआम फ़े यौम ज़ी मसग़बा

    या भूख के दिन रिश्तेदार यतीम या ख़ाकसार

  15. 15 یَتِیمࣰا ذَا مَقۡرَبَةٍ

    यतीम ज़ा मक़रबातिन

    मोहताज को

  16. 16 أَوۡ مِسۡكِینࣰا ذَا مَتۡرَبَةࣲ

    औ मिस्कीन ज़ा मतराबा

    खाना खिलाना

  17. 17 ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوۡا۟ بِٱلصَّبۡرِ وَتَوَاصَوۡا۟ بِٱلۡمَرۡحَمَةِ

    सुम्म काना मिन अल्लाज़ीना अमेनुआ व तवसौ बिस्सबरी व तवसौ बिल मर्हमति

    फिर तो उन लोगों में (शामिल) हो जाता जो ईमान लाए और सब्र की नसीहत और तरस खाने की वसीयत करते रहे

  18. 18 أُو۟لَـٰۤىِٕكَ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَیۡمَنَةِ

    उलाइक असहाबु अल-मैमना

    यही लोग ख़ुश नसीब हैं

  19. 19 وَٱلَّذِینَ كَفَرُوا۟ بِـَٔایَـٰتِنَا هُمۡ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ

    वल्लाज़ीना कफ़रू बे-आ-या-ती-ना हुम असहाबु अल-मशअमति

    और जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया है यही लोग बदबख्त हैं

  20. 20 عَلَیۡهِمۡ نَارࣱ مُّؤۡصَدَةُۢ

    अलैहिम नार मुउसेदाह

    कि उनको आग में डाल कर हर तरफ से बन्द कर दिया जाएगा

This surah in other languages