Goddestination

Al-Munaafiqoon

अल-मुनाफ़िक़ून

कपटी

11 ayahsMedinanहिन्दी

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بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 إِذَا جَاۤءَكَ ٱلۡمُنَـٰفِقُونَ قَالُوا۟ نَشۡهَدُ إِنَّكَ لَرَسُولُ ٱللَّهِۗ وَٱللَّهُ یَعۡلَمُ إِنَّكَ لَرَسُولُهُۥ وَٱللَّهُ یَشۡهَدُ إِنَّ ٱلۡمُنَـٰفِقِینَ لَكَـٰذِبُونَ

    इज़ा जाआका अल मुनाफ़िकून नश्हदु इन्नका लरसुलु वल्लाहु यालमु इन्नका लारसुलुहु वल्लाहु यश्हदु इन्ना अल मुनाफ़िक़ीन लकाज़िबून

    (ऐ रसूल) जब तुम्हारे पास मुनाफेक़ीन आते हैं तो कहते हैं कि हम तो इक़रार करते हैं कि आप यक़नीन ख़ुदा के रसूल हैं और ख़ुदा भी जानता है तुम यक़ीनी उसके रसूल हो मगर ख़ुदा ज़ाहिर किए देता है कि ये लोग अपने (एतक़ाद के लिहाज़ से) ज़रूर झूठे हैं

  2. 2 ٱتَّخَذُوۤا۟ أَیۡمَـٰنَهُمۡ جُنَّةࣰ فَصَدُّوا۟ عَن سَبِیلِ ٱللَّهِۚ إِنَّهُمۡ سَاۤءَ مَا كَانُوا۟ یَعۡمَلُونَ

    इत्तख़ाज़ू ऐमानहुम जिन्नात फ़स्द्दू अन सबील इन्नाहुम सा कानू यामलून

    इन लोगों ने अपनी क़समों को सिपर बना रखा है तो (इसी के ज़रिए से) लोगों को ख़ुदा की राह से रोकते हैं बेशक ये लोग जो काम करते हैं बुरे हैं

  3. 3 ذَ ٰ⁠لِكَ بِأَنَّهُمۡ ءَامَنُوا۟ ثُمَّ كَفَرُوا۟ فَطُبِعَ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَهُمۡ لَا یَفۡقَهُونَ

    ज़ा विश्वास लेका बे-अन-नाहुम अमेनुआ सुम्म कफ़रू फ़ातुबिया अला यफ़क़हूना

    इस सबब से कि (ज़ाहिर में) ईमान लाए फिर काफ़िर हो गए, तो उनके दिलों पर (गोया) मोहर लगा दी गयी है तो अब ये समझते ही नहीं

  4. 4 ۞ وَإِذَا رَأَیۡتَهُمۡ تُعۡجِبُكَ أَجۡسَامُهُمۡۖ وَإِن یَقُولُوا۟ تَسۡمَعۡ لِقَوۡلِهِمۡۖ كَأَنَّهُمۡ خُشُبࣱ مُّسَنَّدَةࣱۖ یَحۡسَبُونَ كُلَّ صَیۡحَةٍ عَلَیۡهِمۡۚ هُمُ ٱلۡعَدُوُّ فَٱحۡذَرۡهُمۡۚ قَـٰتَلَهُمُ ٱللَّهُۖ أَنَّىٰ یُؤۡفَكُونَ

    वा इज़ा राअसहुम तुआ जिबुका अजसामुहुम वा-इन या-कु-लु-वा तस्म लेक़ौलिहिम काअन्नाहुम ख़ोशुब मुसन्नदा यहसबून कुल्ला सैहा हम अल-अदुव्व फहज़रहुम क़ातेलाहुमु अन्ना युफ़्कौन

    और जब तुम उनको देखोगे तो तनासुबे आज़ा की वजह से उनका क़द व क़ामत तुम्हें बहुत अच्छा मालूम होगा और गुफ्तगू करेंगे तो ऐसी कि तुम तवज्जो से सुनो (मगर अक्ल से ख़ाली) गोया दीवारों से लगायी हुयीं बेकार लकड़ियाँ हैं हर चीख़ की आवाज़ को समझते हैं कि उन्हीं पर आ पड़ी ये लोग तुम्हारे दुश्मन हैं तुम उनसे बचे रहो ख़ुदा इन्हें मार डाले ये कहाँ बहके फिरते हैं

  5. 5 وَإِذَا قِیلَ لَهُمۡ تَعَالَوۡا۟ یَسۡتَغۡفِرۡ لَكُمۡ رَسُولُ ٱللَّهِ لَوَّوۡا۟ رُءُوسَهُمۡ وَرَأَیۡتَهُمۡ یَصُدُّونَ وَهُم مُّسۡتَكۡبِرُونَ

    वा इज़ा क़िला लाहुम ता'आला यस्तग़फ़िर लकुम रसूल अल्लाह लौवा रुउसुहुम वरअतहुम यासुदून मुस्तक़्बिरून

    और जब उनसे कहा जाता है कि आओ रसूलअल्लाह तुम्हारे वास्ते मग़फेरत की दुआ करें तो वह लोग अपने सर फेर लेते हैं और तुम उनको देखोगे कि तकब्बुर करते हुए मुँह फेर लेते हैं

  6. 6 سَوَاۤءٌ عَلَیۡهِمۡ أَسۡتَغۡفَرۡتَ لَهُمۡ أَمۡ لَمۡ تَسۡتَغۡفِرۡ لَهُمۡ لَن یَغۡفِرَ ٱللَّهُ لَهُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا یَهۡدِی ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡفَـٰسِقِینَ

    सवाउन अलैहिम अस्तग़फ़र्ता लाहुम अम लम तस्तग़फ़िर लाहुम लैन यग़फ़िर अल्लाह इन्ना अल्लाह अल-कौम अल-फ़ासिक़ीन

    तो तुम उनकी मग़फेरत की दुआ माँगो या न माँगो उनके हक़ में बराबर है (क्यों कि) ख़ुदा तो उन्हें हरगिज़ बख्शेगा नहीं ख़ुदा तो हरगिज़ बदकारों को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता

  7. 7 هُمُ ٱلَّذِینَ یَقُولُونَ لَا تُنفِقُوا۟ عَلَىٰ مَنۡ عِندَ رَسُولِ ٱللَّهِ حَتَّىٰ یَنفَضُّوا۟ۗ وَلِلَّهِ خَزَاۤىِٕنُ ٱلسَّمَـٰوَ ٰ⁠تِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَـٰكِنَّ ٱلۡمُنَـٰفِقِینَ لَا یَفۡقَهُونَ

    हम अल्लाज़ीना याक़ुलून तुन्फिकुव अला एंदा रसूली अल्लाह हत्ता यानफ़द्दू वलिल्लाह ख़ज़ाइनु अस-समावा विश्वास ते वल अर्दि वलाकिन अल मुनाफ़िक़ीन यफ़क़हूना

    ये वही लोग तो हैं जो (अन्सार से) कहते हैं कि जो (मुहाजिरीन) रसूले ख़ुदा के पास रहते हैं उन पर ख़र्च न करो यहाँ तक कि ये लोग ख़ुद तितर बितर हो जाएँ हालॉकि सारे आसमान और ज़मीन के ख़ज़ाने ख़ुदा ही के पास हैं मगर मुनाफेक़ीन नहीं समझते

  8. 8 یَقُولُونَ لَىِٕن رَّجَعۡنَاۤ إِلَى ٱلۡمَدِینَةِ لَیُخۡرِجَنَّ ٱلۡأَعَزُّ مِنۡهَا ٱلۡأَذَلَّۚ وَلِلَّهِ ٱلۡعِزَّةُ وَلِرَسُولِهِۦ وَلِلۡمُؤۡمِنِینَ وَلَـٰكِنَّ ٱلۡمُنَـٰفِقِینَ لَا یَعۡلَمُونَ

    याक़ुलून लायिन ररज्ना इला अल-मदीना लयुख्रिजन्न अल-आअज़्ज़ु मिन्हा अल-अज़ल्ला वलिल्लाह अल-इज़्ज़तु वलरसुलिही वलिल्मु'मिनीन वलाकिन अल मुनाफ़िक़ीन यालमून

    ये लोग तो कहते हैं कि अगर हम लौट कर मदीने पहुँचे तो इज्ज़दार लोग (ख़ुद) ज़लील (रसूल) को ज़रूर निकाल बाहर कर देंगे हालॉकि इज्ज़त तो ख़ास ख़ुदा और उसके रसूल और मोमिनीन के लिए है मगर मुनाफेक़ीन नहीं जानते

  9. 9 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ لَا تُلۡهِكُمۡ أَمۡوَ ٰ⁠لُكُمۡ وَلَاۤ أَوۡلَـٰدُكُمۡ عَن ذِكۡرِ ٱللَّهِۚ وَمَن یَفۡعَلۡ ذَ ٰ⁠لِكَ فَأُو۟لَـٰۤىِٕكَ هُمُ ٱلۡخَـٰسِرُونَ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना अमेनुआ तुलिहकुम अम्वा विश्वास लुकुम वला औलादुकुम अन ज़िक्रि वमन यफ़ल ज़ा विश्वास लेका फ़ौलैक हम अल-खासिरून

    ऐ ईमानदारों तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुमको ख़ुदा की याद से ग़ाफिल न करे और जो ऐसा करेगा तो वही लोग घाटे में रहेंगे

  10. 10 وَأَنفِقُوا۟ مِن مَّا رَزَقۡنَـٰكُم مِّن قَبۡلِ أَن یَأۡتِیَ أَحَدَكُمُ ٱلۡمَوۡتُ فَیَقُولَ رَبِّ لَوۡلَاۤ أَخَّرۡتَنِیۤ إِلَىٰۤ أَجَلࣲ قَرِیبࣲ فَأَصَّدَّقَ وَأَكُن مِّنَ ٱلصَّـٰلِحِینَ

    वा अन्फिकू मिन मा रज़कनाकुम मिन क़ब्लि अन यातिया अहदकुमु अल मौत फ़याक़ूला रब्बी अख़रत्नी अजल क़रीब फ़ासद्दक़ा वा कुन मिन अस-सालिहीन

    और हमने जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें से क़ब्ल इसके (ख़ुदा की राह में) ख़र्च कर डालो कि तुममें से किसी की मौत आ जाए तो (इसकी नौबत न आए कि) कहने लगे कि परवरदिगार तूने मुझे थोड़ी सी मोहलत और क्यों न दी ताकि ख़ैरात करता और नेकीकारों से हो जाता

  11. 11 وَلَن یُؤَخِّرَ ٱللَّهُ نَفۡسًا إِذَا جَاۤءَ أَجَلُهَاۚ وَٱللَّهُ خَبِیرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ

    वेलन यूअख़्खिरा अल्लाह नफ़्सन इज़ा जा अजलुहा वल्लाहु ख़बीर बिमा तामलून

    और जब किसी की मौत आ जाती है तो ख़ुदा उसको हरगिज़ मोहलत नहीं देता और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है

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