Goddestination

Al-Mumtahana

अल-मुमतहिना

परीक्षा लेने वाली स्त्री

13 ayahsMedinanहिन्दी

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بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَّخِذُوا۟ عَدُوِّی وَعَدُوَّكُمۡ أَوۡلِیَاۤءَ تُلۡقُونَ إِلَیۡهِم بِٱلۡمَوَدَّةِ وَقَدۡ كَفَرُوا۟ بِمَا جَاۤءَكُم مِّنَ ٱلۡحَقِّ یُخۡرِجُونَ ٱلرَّسُولَ وَإِیَّاكُمۡ أَن تُؤۡمِنُوا۟ بِٱللَّهِ رَبِّكُمۡ إِن كُنتُمۡ خَرَجۡتُمۡ جِهَـٰدࣰا فِی سَبِیلِی وَٱبۡتِغَاۤءَ مَرۡضَاتِیۚ تُسِرُّونَ إِلَیۡهِم بِٱلۡمَوَدَّةِ وَأَنَا۠ أَعۡلَمُ بِمَاۤ أَخۡفَیۡتُمۡ وَمَاۤ أَعۡلَنتُمۡۚ وَمَن یَفۡعَلۡهُ مِنكُمۡ فَقَدۡ ضَلَّ سَوَاۤءَ ٱلسَّبِیلِ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना अमेनुआ तत्तखिज़ू अदुई वअदुव्वकुम औलिया तुल्कौन इलयहिम बिल-मवद्दति वक़िद कफ़रू बिमा जाआकुम मिन अल-हक़्क़ी युख़्रिजून अर-रसूल वा इय्याकुम अन तुमिनु बिल्लाही रब्बिकुम इन ख़ारजतुम जिहाद फ़े सबीली वाब्तिगा मरज़ियाती तोसेर्रुना इलयहिम बिल-मवद्दति वा अना अ'लामु अख़्फैतुम अ'लानतुम वमन यफ़अल्हु मिन्कुम फ़कद ज़ल्ला सवा अस-सबील

    ऐ ईमानदारों अगर तुम मेरी राह में जेहाद करने और मेरी ख़ुशनूदी की तमन्ना में (घर से) निकलते हो तो मेरे और अपने दुशमनों को दोस्त न बनाओ तुम उनके पास दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो और जो दीन हक़ तुम्हारे पास आया है उससे वह लोग इनकार करते हैं वह लोग रसूल को और तुमको इस बात पर (घर से) निकालते हैं कि तुम अपने परवरदिगार ख़ुदा पर ईमान ले आए हो (और) तुम हो कि उनके पास छुप छुप के दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो हालॉकि तुम कुछ भी छुपा कर या बिल एलान करते हो मैं उससे ख़ूब वाक़िफ़ हूँ और तुममें से जो शख़्श ऐसा करे तो वह सीधी राह से यक़ीनन भटक गया

  2. 2 إِن یَثۡقَفُوكُمۡ یَكُونُوا۟ لَكُمۡ أَعۡدَاۤءࣰ وَیَبۡسُطُوۤا۟ إِلَیۡكُمۡ أَیۡدِیَهُمۡ وَأَلۡسِنَتَهُم بِٱلسُّوۤءِ وَوَدُّوا۟ لَوۡ تَكۡفُرُونَ

    इन यस्कफुकुम याकूनू लकुम अ'दा वयेब्स्टु इलेयकुम ऐदियहुम वा-ल्सिनातहुम बिल्सुइ ववुद्दू लौ तक़्फ़ुरून

    अगर ये लोग तुम पर क़ाबू पा जाएँ तो तुम्हारे दुश्मन हो जाएँ और ईज़ा के लिए तुम्हारी तरफ अपने हाथ भी बढ़ाएँगे और अपनी ज़बाने भी और चाहते हैं कि काश तुम भी काफिर हो जाओ

  3. 3 لَن تَنفَعَكُمۡ أَرۡحَامُكُمۡ وَلَاۤ أَوۡلَـٰدُكُمۡۚ یَوۡمَ ٱلۡقِیَـٰمَةِ یَفۡصِلُ بَیۡنَكُمۡۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِیرࣱ

    लैन तनफ़अकुम अरहामुकुम वला यौम अल-क़ियामा याफ़्सिलु वल्लाहु बिमा तामलून बसीर

    क़यामत के दिन न तुम्हारे रिश्ते नाते ही कुछ काम आएँगे न तुम्हारी औलाद (उस दिन) तो वही फ़ैसला कर देगा और जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है

  4. 4 قَدۡ كَانَتۡ لَكُمۡ أُسۡوَةٌ حَسَنَةࣱ فِیۤ إِبۡرَ ٰ⁠هِیمَ وَٱلَّذِینَ مَعَهُۥۤ إِذۡ قَالُوا۟ لِقَوۡمِهِمۡ إِنَّا بُرَءَ ٰۤ⁠ ؤُا۟ مِنكُمۡ وَمِمَّا تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ كَفَرۡنَا بِكُمۡ وَبَدَا بَیۡنَنَا وَبَیۡنَكُمُ ٱلۡعَدَ ٰ⁠وَةُ وَٱلۡبَغۡضَاۤءُ أَبَدًا حَتَّىٰ تُؤۡمِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَحۡدَهُۥۤ إِلَّا قَوۡلَ إِبۡرَ ٰ⁠هِیمَ لِأَبِیهِ لَأَسۡتَغۡفِرَنَّ لَكَ وَمَاۤ أَمۡلِكُ لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن شَیۡءࣲۖ رَّبَّنَا عَلَیۡكَ تَوَكَّلۡنَا وَإِلَیۡكَ أَنَبۡنَا وَإِلَیۡكَ ٱلۡمَصِیرُ

    क़द कानत लकुम उसवत हसना इबरा विश्वास हेइम वल्लाज़ीना इज़् लेक़ौमिहिम बुरा वा मिन्कुम वमम्मा ताबुदून मिन दूने अल्लाह कफ़र्ना बेकुम वबदा ब्येनना ओबैनकुम अल-अदा विश्वास वथु वलबग़दाउ अबदान हत्ता तुमिनु बिल्लाही वहदहु इल्ला क़ौल इबरा विश्वास हेइम लेआबिहिह ला'स्तग़फ़िरन्ना लका अम्लिकु लका मिन अल्लाह मिन रब्बना अलैक वा इलैक अनब्ना वा इलैक अलमासिरु

    (मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते तो इबराहीम और उनके साथियों (के क़ौल व फेल का अच्छा नमूना मौजूद है) कि जब उन्होने अपनी क़ौम से कहा कि हम तुमसे और उन (बुतों) से जिन्हें तुम ख़ुदा के सिवा पूजते हो बेज़ार हैं हम तो तुम्हारे (दीन के) मुनकिर हैं और जब तक तुम यकता ख़ुदा पर ईमान न लाओ हमारे तुम्हारे दरमियान खुल्लम खुल्ला अदावत व दुशमनी क़ायम हो गयी मगर (हाँ) इबराहीम ने अपने (मुँह बोले) बाप से ये (अलबत्ता) कहा कि मैं आपके लिए मग़फ़िरत की दुआ ज़रूर करूँगा और ख़ुदा के सामने तो मैं आपके वास्ते कुछ एख्तेयार नहीं रखता ऐ हमारे पालने वाले (ख़ुदा) हमने तुझी पर भरोसा कर लिया है और तेरी ही तरफ हम रूजू करते हैं

  5. 5 رَبَّنَا لَا تَجۡعَلۡنَا فِتۡنَةࣰ لِّلَّذِینَ كَفَرُوا۟ وَٱغۡفِرۡ لَنَا رَبَّنَاۤۖ إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِیزُ ٱلۡحَكِیمُ

    तजअलना फितना लिल्लाज़ीन कफ़रू वग़फ़िर लना इन्नका अन्त अल-अज़ीज़ अल-हकीम

    और तेरी तरफ हमें लौट कर जाना है ऐ हमारे पालने वाले तू हम लोगों को काफ़िरों की आज़माइश (का ज़रिया) न क़रार दे और परवरदिगार तू हमें बख्श दे बेशक तू ग़ालिब (और) हिकमत वाला है

  6. 6 لَقَدۡ كَانَ لَكُمۡ فِیهِمۡ أُسۡوَةٌ حَسَنَةࣱ لِّمَن كَانَ یَرۡجُوا۟ ٱللَّهَ وَٱلۡیَوۡمَ ٱلۡـَٔاخِرَۚ وَمَن یَتَوَلَّ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡغَنِیُّ ٱلۡحَمِیدُ

    लकद काना लकुम फेहिम उसवत हसना लिमेन काना यारजू अल्लाह वल्यौम अल-आख़िर वमन यतवल्ला फ़ाइन्ना अल्लाह हुव अल ग़नी अल-हमीदु

    (मुसलमानों) उन लोगों के (अफ़आल) का तुम्हारे वास्ते जो ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत की उम्मीद रखता हो अच्छा नमूना है और जो (इससे) मुँह मोड़े तो ख़ुदा भी यक़ीनन बेपरवा (और) सज़ावारे हम्द है

  7. 7 ۞ عَسَى ٱللَّهُ أَن یَجۡعَلَ بَیۡنَكُمۡ وَبَیۡنَ ٱلَّذِینَ عَادَیۡتُم مِّنۡهُم مَّوَدَّةࣰۚ وَٱللَّهُ قَدِیرࣱۚ وَٱللَّهُ غَفُورࣱ رَّحِیمࣱ

    असा अल्लाह अन यजाला वबैन अल्लाज़ीना अदाइतुम मवद्दा वल्लाहु वल्लाहु ग़फूर रहीम

    करीब है कि ख़ुदा तुम्हारे और उनमें से तुम्हारे दुश्मनों के दरमियान दोस्ती पैदा कर दे और ख़ुदा तो क़ादिर है और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

  8. 8 لَّا یَنۡهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِینَ لَمۡ یُقَـٰتِلُوكُمۡ فِی ٱلدِّینِ وَلَمۡ یُخۡرِجُوكُم مِّن دِیَـٰرِكُمۡ أَن تَبَرُّوهُمۡ وَتُقۡسِطُوۤا۟ إِلَیۡهِمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ یُحِبُّ ٱلۡمُقۡسِطِینَ

    ला यान्हाकुमु अल्लाह अने अल्लाज़ीना लम यूका तेलुओकुम फ़े अद-दीन वलम युख़्रिजुकुम मिन दियारिकुम अन तबर्रुहुम वा तुक़िस्तुआ इन्ना अल्लाह यूहिब्बु अल-मुक़्सितीन

    जो लोग तुमसे तुम्हारे दीन के बारे में नहीं लड़े भिड़े और न तुम्हें घरों से निकाले उन लोगों के साथ एहसान करने और उनके साथ इन्साफ़ से पेश आने से ख़ुदा तुम्हें मना नहीं करता बेशक ख़ुदा इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है

  9. 9 إِنَّمَا یَنۡهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِینَ قَـٰتَلُوكُمۡ فِی ٱلدِّینِ وَأَخۡرَجُوكُم مِّن دِیَـٰرِكُمۡ وَظَـٰهَرُوا۟ عَلَىٰۤ إِخۡرَاجِكُمۡ أَن تَوَلَّوۡهُمۡۚ وَمَن یَتَوَلَّهُمۡ فَأُو۟لَـٰۤىِٕكَ هُمُ ٱلظَّـٰلِمُونَ

    यान्हाकुमु अल्लाह अने अल्लाज़ीना कातेलुकुम फ़े अद-दीन और तुम्हें बाहर निकाला मिन दियारिकुम वज़ाहरु इख़्राजिकुम अन तवल्लौहुम वमन यता वल्लाहुम फ़ौलैक हम अज़-ज़़ालिमून

    ख़ुदा तो बस उन लोगों के साथ दोस्ती करने से मना करता है जिन्होने तुमसे दीन के बारे में लड़ाई की और तुमको तुम्हारे घरों से निकाल बाहर किया, और तुम्हारे निकालने में (औरों की) मदद की और जो लोग ऐसों से दोस्ती करेंगे वह लोग ज़ालिम हैं

  10. 10 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوۤا۟ إِذَا جَاۤءَكُمُ ٱلۡمُؤۡمِنَـٰتُ مُهَـٰجِرَ ٰ⁠تࣲ فَٱمۡتَحِنُوهُنَّۖ ٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِإِیمَـٰنِهِنَّۖ فَإِنۡ عَلِمۡتُمُوهُنَّ مُؤۡمِنَـٰتࣲ فَلَا تَرۡجِعُوهُنَّ إِلَى ٱلۡكُفَّارِۖ لَا هُنَّ حِلࣱّ لَّهُمۡ وَلَا هُمۡ یَحِلُّونَ لَهُنَّۖ وَءَاتُوهُم مَّاۤ أَنفَقُوا۟ۚ وَلَا جُنَاحَ عَلَیۡكُمۡ أَن تَنكِحُوهُنَّ إِذَاۤ ءَاتَیۡتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّۚ وَلَا تُمۡسِكُوا۟ بِعِصَمِ ٱلۡكَوَافِرِ وَسۡـَٔلُوا۟ مَاۤ أَنفَقۡتُمۡ وَلۡیَسۡـَٔلُوا۟ مَاۤ أَنفَقُوا۟ۚ ذَ ٰ⁠لِكُمۡ حُكۡمُ ٱللَّهِ یَحۡكُمُ بَیۡنَكُمۡۖ وَٱللَّهُ عَلِیمٌ حَكِیمࣱ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना इज़ा जाआकुमु अल-मुमिनात मुहाजिर विश्वास ते फ़ाम्तेहिनुहुन्ना अल्लाह अ'लामु बेइमानेहिन अलिम्तुमूहुन्न मुअ्मिनात फ़ला तर्जिउहुन्ना इला हुन्ना हिन्न ल्लाहुम हुम याहिल्लूना लाहुन्ना वा आतुहुम अन्फाकु जुनाह अलैकुम अन तन्केहुहुन्ना अतियतुमुहुन्न तुम्सिकुआ बिसेमि अल-कवाफ़िर वसअलु मा अन्फकतुम वलयसअलु मा अन्फाकु ज़ा विश्वास लेकुम हुक्मु अल्लाह यहकुमु वल्लाहु अलीमुन हकीम

    ऐ ईमानदारों जब तुम्हारे पास ईमानदार औरतें वतन छोड़ कर आएँ तो तुम उनको आज़मा लो, ख़ुदा तो उनके ईमान से वाकिफ़ है ही, पस अगर तुम भी उनको ईमानदार समझो तो उन्ही काफ़िरों के पास वापस न फेरो न ये औरतें उनके लिए हलाल हैं और न वह कुफ्फ़ार उन औरतों के लिए हलाल हैं और उन कुफ्फार ने जो कुछ (उन औरतों के मेहर में) ख़र्च किया हो उनको दे दो, और जब उनका महर उन्हें दे दिया करो तो इसका तुम पर कुछ गुनाह नहीं कि तुम उससे निकाह कर लो और काफिर औरतों की आबरू (जो तुम्हारी बीवियाँ हों) अपने कब्ज़े में न रखो (छोड़ दो कि कुफ्फ़ार से जा मिलें) और तुमने जो कुछ (उन पर) ख़र्च किया हो (कुफ्फ़ार से) लो, और उन्होने भी जो कुछ ख़र्च किया हो तुम से माँग लें यही ख़ुदा का हुक्म है जो तुम्हारे दरमियान सादिर करता है और ख़ुदा वाक़िफ़कार हकीम है

  11. 11 وَإِن فَاتَكُمۡ شَیۡءࣱ مِّنۡ أَزۡوَ ٰ⁠جِكُمۡ إِلَى ٱلۡكُفَّارِ فَعَاقَبۡتُمۡ فَـَٔاتُوا۟ ٱلَّذِینَ ذَهَبَتۡ أَزۡوَ ٰ⁠جُهُم مِّثۡلَ مَاۤ أَنفَقُوا۟ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ٱلَّذِیۤ أَنتُم بِهِۦ مُؤۡمِنُونَ

    वा-इन फातकुम अज़्वा विश्वास जेकुम इला अल-कुफ्फारि फ़ाआकबतुम फ़ायातू अल्लाज़ीना ज़हबत अज़्वा विश्वास जुम मिस्ल मा अन्फाकु वत्तक़ू अल्लाह बेहि मुअ्मिनून

    और अगर तुम्हारी बीवियों में से कोई औरत तुम्हारे हाथ से निकल कर काफिरों के पास चली जाए और (ख़र्च न मिले) और तुम (उन काफ़िरों से लड़ो और लूटो तो (माले ग़नीमत से) जिनकी औरतें चली गयीं हैं उनको इतना दे दो जितना उनका ख़र्च हुआ है) और जिस ख़ुदा पर तुम लोग ईमान लाए हो उससे डरते रहो

  12. 12 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلنَّبِیُّ إِذَا جَاۤءَكَ ٱلۡمُؤۡمِنَـٰتُ یُبَایِعۡنَكَ عَلَىٰۤ أَن لَّا یُشۡرِكۡنَ بِٱللَّهِ شَیۡـࣰٔا وَلَا یَسۡرِقۡنَ وَلَا یَزۡنِینَ وَلَا یَقۡتُلۡنَ أَوۡلَـٰدَهُنَّ وَلَا یَأۡتِینَ بِبُهۡتَـٰنࣲ یَفۡتَرِینَهُۥ بَیۡنَ أَیۡدِیهِنَّ وَأَرۡجُلِهِنَّ وَلَا یَعۡصِینَكَ فِی مَعۡرُوفࣲ فَبَایِعۡهُنَّ وَٱسۡتَغۡفِرۡ لَهُنَّ ٱللَّهَۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورࣱ رَّحِیمࣱ

    या अय्युहा अन-नबिय्यु इज़ा जाआका अल-मुमिनात यूबायेनका अन ला युश्रिक्न बिल्लाही यास्रिक्ना यज़्नीना यक़्तुल्न औलादाहुन्ना यातीना बिबूतान यफ़्तरीनहु बयना अय्दिहिन्न वा अर्जुलिहिन्ना या'सीनका फ़े मारूफ़ फ़बायिआहुन्ना वस्तग़फ़िर इन्ना अल्लाह ग़फूर रहीम

    (ऐ रसूल) जब तुम्हारे पास ईमानदार औरतें तुमसे इस बात पर बैयत करने आएँ कि वह न किसी को ख़ुदा का शरीक बनाएँगी और न चोरी करेंगी और न जेना करेंगी और न अपनी औलाद को मार डालेंगी और न अपने हाथ पाँव के सामने कोई बोहतान (लड़के का शौहर पर) गढ़ के लाएँगी, और न किसी नेक काम में तुम्हारी नाफ़रमानी करेंगी तो तुम उनसे बैयत ले लो और ख़ुदा से उनके मग़फ़िरत की दुआ माँगो बेशक बड़ा ख़ुदा बख्शने वाला मेहरबान है

  13. 13 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَوَلَّوۡا۟ قَوۡمًا غَضِبَ ٱللَّهُ عَلَیۡهِمۡ قَدۡ یَىِٕسُوا۟ مِنَ ٱلۡـَٔاخِرَةِ كَمَا یَىِٕسَ ٱلۡكُفَّارُ مِنۡ أَصۡحَـٰبِ ٱلۡقُبُورِ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना अमेनुआ ततावल्ला कौमा ग़ज़िब अल्लाह अलैहिम क़द यीसु मिन अल-आख़िरति येसी अल-कुफ़्फ़ारु असहाबि अल-कुबूरी

    ऐ ईमानदारों जिन लोगों पर ख़ुदा ने अपना ग़ज़ब ढाया उनसे दोस्ती न करो (क्योंकि) जिस तरह काफ़िरों को मुर्दों (के दोबारा ज़िन्दा होने) की उम्मीद नहीं उसी तरह आख़ेरत से भी ये लोग न उम्मीद हैं

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