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At-Tahrim

अत-तहरीम

निषेध

12 ayahsMedinanहिन्दी

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بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلنَّبِیُّ لِمَ تُحَرِّمُ مَاۤ أَحَلَّ ٱللَّهُ لَكَۖ تَبۡتَغِی مَرۡضَاتَ أَزۡوَ ٰ⁠جِكَۚ وَٱللَّهُ غَفُورࣱ رَّحِیمࣱ

    या अय्युहा अन-नबिय्यु लेमा तोहरीमु मा अहल्ल अल्लाह तबतगी मरज़ात अज़्वा विश्वास जेक वल्लाहु ग़फूर रहीम

    ऐ रसूल जो चीज़ ख़ुदा ने तुम्हारे लिए हलाल की है तुम उससे अपनी बीवियों की ख़ुशनूदी के लिए क्यों किनारा कशी करो और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

  2. 2 قَدۡ فَرَضَ ٱللَّهُ لَكُمۡ تَحِلَّةَ أَیۡمَـٰنِكُمۡۚ وَٱللَّهُ مَوۡلَىٰكُمۡۖ وَهُوَ ٱلۡعَلِیمُ ٱلۡحَكِیمُ

    क़द फ़रज़ अल्लाह लकुम ताहिल्लता ऐमानिकुम वल्लाहु मौलायकुम वहुव अल-अलीम अल-हकीम

    ख़ुदा ने तुम लोगों के लिए क़समों को तोड़ डालने का कफ्फ़ार मुक़र्रर कर दिया है और ख़ुदा ही तुम्हारा कारसाज़ है और वही वाक़िफ़कार हिकमत वाला है

  3. 3 وَإِذۡ أَسَرَّ ٱلنَّبِیُّ إِلَىٰ بَعۡضِ أَزۡوَ ٰ⁠جِهِۦ حَدِیثࣰا فَلَمَّا نَبَّأَتۡ بِهِۦ وَأَظۡهَرَهُ ٱللَّهُ عَلَیۡهِ عَرَّفَ بَعۡضَهُۥ وَأَعۡرَضَ عَنۢ بَعۡضࣲۖ فَلَمَّا نَبَّأَهَا بِهِۦ قَالَتۡ مَنۡ أَنۢبَأَكَ هَـٰذَاۖ قَالَ نَبَّأَنِیَ ٱلۡعَلِیمُ ٱلۡخَبِیرُ

    वा इज़ असर्र अन-नबिय्यु इला बस अज़्वा विश्वास जेहि हदीसन फ़लम्मा नब्बाअत बेहि और उसे प्रकट किया अल्लाह अलय्हि अर्राफ़ बअस्हु वअरद फ़लम्मा नब्बाहा बेहि क़ालत अन्बाअक क़ाला नब्बानिय अल-अलीम अल ख़बीरु

    और जब पैग़म्बर ने अपनी बाज़ बीवी (हफ़सा) से चुपके से कोई बात कही फिर जब उसने (बावजूद मुमानियत) उस बात की (आयशा को) ख़बर दे दी और ख़ुदा ने इस अम्र को रसूल पर ज़ाहिर कर दिया तो रसूल ने (आयशा को) बाज़ बात (किस्सा मारिया) जता दी और बाज़ बात (किस्साए यहद) टाल दी ग़रज़ जब रसूल ने इस वाक़िये (हफ़सा के अफ़शाए राज़) कि उस (आयशा) को ख़बर दी तो हैरत से बोल उठीं आपको इस बात (अफ़शाए राज़) की किसने ख़बर दी रसूल ने कहा मुझे बड़े वाक़िफ़कार ख़बरदार (ख़ुदा) ने बता दिया

  4. 4 إِن تَتُوبَاۤ إِلَى ٱللَّهِ فَقَدۡ صَغَتۡ قُلُوبُكُمَاۖ وَإِن تَظَـٰهَرَا عَلَیۡهِ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ مَوۡلَىٰهُ وَجِبۡرِیلُ وَصَـٰلِحُ ٱلۡمُؤۡمِنِینَۖ وَٱلۡمَلَـٰۤىِٕكَةُ بَعۡدَ ذَ ٰ⁠لِكَ ظَهِیرٌ

    इन तातुबा इला अल्लाह फ़कद सग़त क़ुलूबुकुमा वा-इन ताज़ाहरा अलय्हि फ़ाइन्ना अल्लाह हुव मौला वजीब्रील वसालिहु वल्मलाइकतु बाद ज़ा विश्वास लेका ज़हीर

    (तो ऐ हफ़सा व आयशा) अगर तुम दोनों (इस हरकत से) तौबा करो तो ख़ैर क्योंकि तुम दोनों के दिल टेढ़े हैं और अगर तुम दोनों रसूल की मुख़ालेफ़त में एक दूसरे की अयानत करती रहोगी तो कुछ परवा नहीं (क्यों कि) ख़ुदा और जिबरील और तमाम ईमानदारों में नेक शख़्श उनके मददगार हैं और उनके अलावा कुल फरिश्ते मददगार हैं

  5. 5 عَسَىٰ رَبُّهُۥۤ إِن طَلَّقَكُنَّ أَن یُبۡدِلَهُۥۤ أَزۡوَ ٰ⁠جًا خَیۡرࣰا مِّنكُنَّ مُسۡلِمَـٰتࣲ مُّؤۡمِنَـٰتࣲ قَـٰنِتَـٰتࣲ تَـٰۤىِٕبَـٰتٍ عَـٰبِدَ ٰ⁠تࣲ سَـٰۤىِٕحَـٰتࣲ ثَیِّبَـٰتࣲ وَأَبۡكَارࣰا

    असा इन तल्लाकुन्ना अन युब्दिलाहु अज़्वा विश्वास जा खैरन मिन्कुन्ना मुस्लिमात मुमिनात क़ानितात ता-इ-बा-त आबिद विश्वास ते साइहात सैय्यिबातिन वा अब्कारन

    अगर रसूल तुम लोगों को तलाक़ दे दे तो अनक़रीब ही उनका परवरदिगार तुम्हारे बदले उनको तुमसे अच्छी बीवियाँ अता करे जो फ़रमाबरदार ईमानदार ख़ुदा रसूल की मुतीय (गुनाहों से) तौबा करने वालियाँ इबादत गुज़ार रोज़ा रखने वालियाँ ब्याही हुई

  6. 6 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ قُوۤا۟ أَنفُسَكُمۡ وَأَهۡلِیكُمۡ نَارࣰا وَقُودُهَا ٱلنَّاسُ وَٱلۡحِجَارَةُ عَلَیۡهَا مَلَـٰۤىِٕكَةٌ غِلَاظࣱ شِدَادࣱ لَّا یَعۡصُونَ ٱللَّهَ مَاۤ أَمَرَهُمۡ وَیَفۡعَلُونَ مَا یُؤۡمَرُونَ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना अमेनुआ क़ुवा अनफुसकुम वा अह्लिकुम नारा वक़ूदुहा अन-नास वल्हिजारा अलय्हा मलाईका ग़िलाज़ शेदाद ला यासउना अल्लाह मा अमरहुम वयफ़लून यु'मरून

    और बिन ब्याही कुंवारियाँ हो ऐ ईमानदारों अपने आपको और अपने लड़के बालों को (जहन्नुम की) आग से बचाओ जिसके इंधन आदमी और पत्थर होंगे उन पर वह तन्दख़ू सख्त मिजाज़ फ़रिश्ते (मुक़र्रर) हैं कि ख़ुदा जिस बात का हुक्म देता है उसकी नाफरमानी नहीं करते और जो हुक्म उन्हें मिलता है उसे बजा लाते हैं

  7. 7 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ كَفَرُوا۟ لَا تَعۡتَذِرُوا۟ ٱلۡیَوۡمَۖ إِنَّمَا تُجۡزَوۡنَ مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना कफ़रू ता'ताज़िरू तुज्वोन तामलून

    (जब कुफ्फ़ार दोज़ख़ के सामने आएँगे तो कहा जाएगा) काफ़िरों आज बहाने न ढूँढो जो कुछ तुम करते थे तुम्हें उसकी सज़ा दी जाएगी

  8. 8 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ تُوبُوۤا۟ إِلَى ٱللَّهِ تَوۡبَةࣰ نَّصُوحًا عَسَىٰ رَبُّكُمۡ أَن یُكَفِّرَ عَنكُمۡ سَیِّـَٔاتِكُمۡ وَیُدۡخِلَكُمۡ جَنَّـٰتࣲ تَجۡرِی مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَـٰرُ یَوۡمَ لَا یُخۡزِی ٱللَّهُ ٱلنَّبِیَّ وَٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥۖ نُورُهُمۡ یَسۡعَىٰ بَیۡنَ أَیۡدِیهِمۡ وَبِأَیۡمَـٰنِهِمۡ یَقُولُونَ رَبَّنَاۤ أَتۡمِمۡ لَنَا نُورَنَا وَٱغۡفِرۡ لَنَاۤۖ إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَیۡءࣲ قَدِیرࣱ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना अमेनुआ तुबुआ इला अल्लाह तौबा नसूहां असा रब्बुकुम अन योकफ़्फ़िरा अनकुम सैय्यातिकुम वयुधिलकुम तजरी मिन तहतिहा अल-अन्हारु यौम युख़्ज़ी अल्लाह अन-नबिय्य वल्लाज़ीना अमेनुआ माअहु नुरुहुम यसा बयना अय्दिहिम वबयामिनिहिम याक़ुलून रब्बना अत्मिम लना नूराना वग़फ़िर इन्नका अला कुल्लि शै क़दीर

    ऐ ईमानदारों ख़ुदा की बारगाह में साफ़ ख़ालिस दिल से तौबा करो तो (उसकी वजह से) उम्मीद है कि तुम्हारा परवरदिगार तुमसे तुम्हारे गुनाह दूर कर दे और तुमको (बेहिश्त के) उन बाग़ों में दाखिल करे जिनके नीचे नहरें जारी हैं उस दिन जब ख़ुदा रसूल को और उन लोगों को जो उनके साथ ईमान लाए हैं रूसवा नहीं करेगा (बल्कि) उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दाहिने तरफ़ (रौशनी करता) चल रहा होगा और ये लोग ये दुआ करते होंगे परवरदिगार हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमें बख्य दे बेशक तू हर चीज़ पर कादिर है

  9. 9 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلنَّبِیُّ جَـٰهِدِ ٱلۡكُفَّارَ وَٱلۡمُنَـٰفِقِینَ وَٱغۡلُظۡ عَلَیۡهِمۡۚ وَمَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِیرُ

    या अय्युहा अन-नबिय्यु जाहिद अल-कुफ्फार वल्मुनाफिकीन वग़्लुज़ व म अवा हुम जहन्नम उबेसा अलमासिरु

    ऐ रसूल काफ़िरों और मुनाफ़िकों से जेहाद करो और उन पर सख्ती करो और उनका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है

  10. 10 ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلࣰا لِّلَّذِینَ كَفَرُوا۟ ٱمۡرَأَتَ نُوحࣲ وَٱمۡرَأَتَ لُوطࣲۖ كَانَتَا تَحۡتَ عَبۡدَیۡنِ مِنۡ عِبَادِنَا صَـٰلِحَیۡنِ فَخَانَتَاهُمَا فَلَمۡ یُغۡنِیَا عَنۡهُمَا مِنَ ٱللَّهِ شَیۡـࣰٔا وَقِیلَ ٱدۡخُلَا ٱلنَّارَ مَعَ ٱلدَّ ٰ⁠خِلِینَ

    दारबा अल्लाह लिल्लाज़ीन कफ़रू इमराअत वम्रअत लूत कानाता तहता अब्दय्नि इबादिना सालिहीन फ़खानाताहुमा फ़लम युग़्निया अन्हुमा मिन अल्लाह वकील उधुला अन-नार माआ अल्दा विश्वास ख़ेलिना

    ख़ुदा ने काफिरों (की इबरत) के वास्ते नूह की बीवी (वाएला) और लूत की बीवी (वाहेला) की मसल बयान की है कि ये दोनो हमारे बन्दों के तसर्रुफ़ थीं तो दोनों ने अपने शौहरों से दगा की तो उनके शौहर ख़ुदा के मुक़ाबले में उनके कुछ भी काम न आए और उनको हुक्म दिया गया कि और जाने वालों के साथ जहन्नुम में तुम दोनों भी दाखिल हो जाओ

  11. 11 وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلࣰا لِّلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ ٱمۡرَأَتَ فِرۡعَوۡنَ إِذۡ قَالَتۡ رَبِّ ٱبۡنِ لِی عِندَكَ بَیۡتࣰا فِی ٱلۡجَنَّةِ وَنَجِّنِی مِن فِرۡعَوۡنَ وَعَمَلِهِۦ وَنَجِّنِی مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِینَ

    वदरब अल्लाह लिल्लाज़ीन अमेनुआ इमराअत फ़िरऔन इज़् क़ालत रब्बी इब्नि लेइ इंदक बैतन फ़े अल जन्नत वनेज्जिनी मिन फ़िरऔन वा अमालिही वनेज्जिनी मिन अल-कौमी अज़-ज़़ालिमीन

    और ख़ुदा ने मोमिनीन (की तसल्ली) के लिए फिरऔन की बीवी (आसिया) की मिसाल बयान फ़रमायी है कि जब उसने दुआ की परवरदिगार मेरे लिए अपने यहाँ बेहिश्त में एक घर बना और मुझे फिरऔन और उसकी कारस्तानी से नजात दे और मुझे ज़ालिम लोगो (के हाथ) से छुटकारा अता फ़रमा

  12. 12 وَمَرۡیَمَ ٱبۡنَتَ عِمۡرَ ٰ⁠نَ ٱلَّتِیۤ أَحۡصَنَتۡ فَرۡجَهَا فَنَفَخۡنَا فِیهِ مِن رُّوحِنَا وَصَدَّقَتۡ بِكَلِمَـٰتِ رَبِّهَا وَكُتُبِهِۦ وَكَانَتۡ مِنَ ٱلۡقَـٰنِتِینَ

    वा-मरियम इब्ना इम्र विश्वास ना अह्सनत फ़र्जहा फानफ़ख्ना फ़िये मिन रूहिना वा सद्दकत बिकालिमाति रब्बिहा व कुतुबिहि वकानत मिन अल क़ानितीन

    और (दूसरी मिसाल) इमरान की बेटी मरियम जिसने अपनी शर्मगाह को महफूज़ रखा तो हमने उसमें रूह फूंक दी और उसने अपने परवरदिगार की बातों और उसकी किताबों की तस्दीक़ की और फरमाबरदारों में थी

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